एटीएस हेवेनली फूटहिल्स में वर्षों से दबंगई, भय व विवादों के पर्याय बने बिल्डर पुनीत अग्रवाल के विरुद्ध अब कार्रवाई केवल जिला प्रशासन व पुलिस तक सीमित नहीं रही, बल्कि मामला न्यायिक निगरानी में चौतरफा जांच के दायरे में पहुंच गया है।

गुंडा एक्ट की कार्रवाई रुकवाने को बिल्डर की ओर से दायर अपील पर गुरुवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि कार्रवाई विधि अनुसार जारी रहेगी।

अदालत ने न केवल बिल्डर को कड़ी फटकार लगाई, बल्कि प्रशासन और पुलिस को पूरे प्रकरण की हर परत खोलने के निर्देश दे दिए।

सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी सविन बंसल, एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल, एसपी देहात जया बलूनी और पीड़ित विज्ञानी की पत्नी हिमशिखा वीडियो कांफ्रेंसिंग से अदालत से जुड़ीं। एटीएस कालोनी के अध्यक्ष एके सिंह भी न्यायालय में मौजूद रहे।

अदालत ने एसपी देहात जया बलूनी की अध्यक्षता में गठित एसआइटी को निर्देश दिया कि सभी वीडियो फुटेज, फोटो, शिकायतें, पुलिस रिकार्ड और घटनाओं की शृंखला का हर पहलू गंभीरता से जांचकर 14 मई तक प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए।

इस आदेश के बाद अब पुलिस केवल हालिया मारपीट प्रकरण नहीं, बल्कि उन पुराने मामलों की भी फाइलें खोल रही है, जिनमें पहले फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लग चुकी है।

सवाल यही है कि लगातार शिकायतों, तनाव और विवादों के बावजूद कई मुकदमे किन आधारों पर बंद हुए। सूत्रों के अनुसार 2021 से अब तक दर्ज शिकायतों, तहरीरों, समझौतों और बंद की गई विवेचनाओं का रिकार्ड निकाला जा रहा है।

डीएम के पास जमा रहेगा बिल्डर का पासपोर्ट

हाईकोर्ट ने बिल्डर पुनीत अग्रवाल को अपना पासपोर्ट शुक्रवार तक जिलाधिकारी के पास जमा कराने के आदेश दिए हैं। ऐसे में अब बिल्डर देश के बाहर नहीं जा सकेगा।

यही नहीं, कालोनीवासियों की शिकायत पर हाईकोर्ट ने बिल्डर के सभी वाहन जब्त करने की भी तैयारी कर ली थी, लेकिन बिल्डर के आग्रह के बाद वाहन जब्त नहीं किए गए।

कालोनीवासियों ने शिकायत की थी कि बिल्डर तेज गति में वाहन दौड़ाकर दहशत पैदा करता है।

एटीएस की जमीन पर खुला नया मोर्चा, नक्शा निरस्त

सुनवाई के दौरान कालोनीवासियों ने आरोप लगाया कि बिल्डर गोल्डन फारेस्ट से जुड़ी जमीन पर कब्जे की कोशिश कर रहा है।

इस पर अदालत ने जिलाधिकारी को पूरी एटीएस कालोनी की भूमि का सत्यापन कराने के निर्देश दिए।

साथ ही मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा एटीएस एक्सटेंशन के लिए स्वीकृत नक्शे को भी निरस्त करने का आदेश दिया गया। इसका मतलब अब निर्माण, विस्तार और स्वीकृतियों की वैधता भी जांच के घेरे में आ गई है।

विज्ञानी से मारपीट बना निर्णायक मोड़

हालिया विवाद में डिफेंस इलेक्ट्रानिक्स एप्लीकेशन लैबोरेटरी के विज्ञानी अनिरुद्ध शर्मा के साथ कथित मारपीट ने पूरे मामले को निर्णायक मोड़ दिया।

आरोप है कि पहले उनके माता-पिता से अभद्रता हुई, फिर विरोध करने पर विज्ञानी को परिसर में बुलाकर हमला किया गया, जिससे उनके कान का पर्दा क्षतिग्रस्त हुआ।

इसी के बाद जिलाधिकारी ने गुंडा एक्ट नोटिस जारी किया और पांच मई को व्यक्तिगत सुनवाई तय की।

सीसीटीवी, चयनित फुटेज और जांच पर सवाल

पीड़ित पक्ष का कहना है कि पूरी घटना सीसीटीवी में दर्ज है, लेकिन मूल फुटेज अभी तक पूरी तरह सुरक्षित नहीं की गई।

आरोप है कि चुनिंदा वीडियो क्लिप्स इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर नैरेटिव प्रभावित करने की कोशिश हुई। अब अदालत के आदेश के बाद वीडियो साक्ष्यों की तकनीकी जांच भी संभावित है।

थार सीज से शुरू हुई सख्ती, अब संपत्ति तक जांच

रविवार रात पुलिस पहले ही बिल्डर की महिंद्रा थार सीज कर चुकी है। कालोनीवासियों का आरोप है कि तेज रफ्तार में वाहन दौड़ाकर भय का वातावरण बनाया जाता था और विरोध करने वालों पर दबाव बनाया जाता था।

करीब 12 घंटे चली पूछताछ के बाद अब प्रशासन बिल्डर की संपत्तियों, कारोबारी गतिविधियों और प्रभाव के दायरे की भी पड़ताल कर रहा है।

2021 से दबाव, अब निर्णायक मोड़

कालोनीवासियों के अनुसार वर्ष 2021 से डर, विवाद, धमकी और तनाव का माहौल बना हुआ था, लेकिन पहली बार प्रशासनिक और न्यायिक कार्रवाई एक साथ इतनी सख्ती से आगे बढ़ी है।

अब गुंडा एक्ट, भूमि सत्यापन, पुराने मुकदमे, संपत्ति जांच और पुलिस विवेचना, सभी धाराएं एक साथ सक्रिय हो चुकी हैं।

एटीएस कालोनी में अब सवाल केवल एक बिल्डर के व्यवहार का नहीं, बल्कि उन वर्षों की परतें खोलने का है जिनमें शिकायतें थीं, लेकिन निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई। अब हर बंद फाइल फिर से बोल सकती है।

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